- Riteish Deshmukh takes a leap into Telugu cinema with Ram Pothineni’s RAPO23
- From Ananya Panday to Kashika Kapoor to Janhvi Kapoor - 5 OG Bollywood Beauties Who Will Give You the Perfect Garba Looks You Need This Navratri
- From Reena Malhotra to Kamalpreet Dhanoa: 25 Years of Dia Mirza and Her Evolution as an Actor
- Who is Pragati Srivastava? The Fresh Face Set for a Promising Bollywood Debut with Aanand L Rai’s Nakhrewaalii
- Mia by Tanishq Launches "Lightscapes": A Jewellery Collection Inspired by the Magic of Festive Lights
भारतीय होम्योपैथी-तप, विज्ञान और सेवा का संगम इसलिए विश्व में अग्रणी: डॉ एके द्विवेदी
विश्व होम्योपैथी दिवस पर शिलांग में आयोजित कार्यक्रम
शिलांग (मेघालय)। इंदौर( म प्र) १० अप्रैल. नार्थ ईस्टर्न इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद & होम्योपैथी में विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर के प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ . ए के द्विवेदी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में चिकित्सा के वैज्ञानिक एवं मानवीय पक्ष पर अत्यंत प्रभावशाली विचार व्यक्त किए।
वाइटल फोर्स के साथ ‘वाइटल फ्लुइड’ (रक्त) का महत्व
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा में वाइटल फोर्स (जीवनी शक्ति) को तो विस्तार से पढ़ाया जाता है, किंतु वाइटल फ्लुइड अर्थात् रक्त के महत्व को समान रूप से महत्व नहीं दिया जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
- रक्त के बिना जीवन संभव नहीं है
- हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन, पोषण एवं हार्मोन का वहन करता है
- शरीर में रक्त की पर्याप्त मात्रा एवं शुद्धता स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है
गंभीर रोगों पर सफल कार्य का प्रस्तुतीकरण
डॉ. द्विवेदी ने अपने संबोधन में कैंसर के बाद उत्पन्न पैनसाइटोपीनिया एवं अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित बच्चों, महिलाओं एवं वृद्धजनों के सफल उपचारों की केस-सीरीज़ पावर पॉइंट के माध्यम से प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि समर्पित एवं कारण-आधारित चिकित्सा से जटिल रोगों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
चिकित्सा रूपी तपस्या और हीलिंग पावर
उन्होंने कहा “जितनी शिद्दत से चिकित्सक चिकित्सा रूपी तपस्या करेगा, उतनी ही उसकी हीलिंग पावर बढ़ेगी।”
यह संदेश चिकित्सा को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि साधना के रूप में स्थापित करता है।
डॉ द्विवेदी ने भारतीय होम्योपैथी को तप, विज्ञान और सेवा का संगम के कारण सम्पूर्ण विश्व का सिरमौर बताया
और अंत में डॉ. द्विवेदी ने अपना संबोधन इन प्रेरणादायी शब्दों के साथ संपन्न किया—
“खून बढ़ेगा तो कार्यक्षमता बढ़ेगी, और एनीमिया मुक्त समाज ही सशक्त एवं समृद्ध भारत की सुदृढ़ नींव है।”
समन्वित (इंटीग्रेटेड) चिकित्सा प्रणाली की विशेषता
कार्यक्रम में डॉ . विजय कुमार(प्रभारी निदेशक) ने बताया कि यह संस्थान आयुष मंत्रालय का एक विशिष्ट केंद्र है, जहाँ—
- आयुर्वेद एवं होम्योपैथी दोनों चिकित्सा पद्धतियाँ एक ही भवन में उपलब्ध हैं
- दोनों के पृथक-पृथक वार्ड में रोगियों का उपचार किया जाता है
- जटिल एवं असाध्य रोगों में समन्वित चिकित्सा (इंटीग्रेटेड ट्रीटमेंट) की व्यवस्था अपनाई जाती है
अन्य विशेषज्ञों के विचार
- डॉ . लखन ने कैंसर रोग में जीन (आनुवंशिक तत्वों) की भूमिका पर प्रकाश डाला
- उप-निदेशक श्री ए. वनसाई शाइनरेट ने संस्थान में आधुनिक सुविधाओं के विकास हेतु डॉ. द्विवेदी के योगदान की सराहना की
सम्मान, प्रेरणा और सेवा का संदेश
इस अवसर पर डॉ. द्विवेदी को शाल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया
- विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए
- अस्पताल के वार्ड में भर्ती रोगियों को फल वितरित कर सेवा भाव का संदेश दिया गया
आभार एवं सफल आयोजन
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ बी पी खाइन ने वोट ऑफ थैंक्स (आभार प्रदर्शन) प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षकगण, स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक बताया।
निष्कर्ष
यह आयोजन चिकित्सा, शोध, सेवा और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम रहा, जिसने यह संदेश दिया कि समर्पण, अनुशासन और समन्वित दृष्टिकोण से चिकित्सा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।


